झीरम घाटी कांड पर सियासत, भूपेश बघेल बोले- BJP ने जांच नहीं होने दी, CM साय ने कहा विपक्ष भ्रम फैला रहा

झीरम घाटी कांड पर सियासत, भूपेश बघेल बोले- BJP ने जांच नहीं होने दी, CM साय ने कहा विपक्ष भ्रम फैला रहा

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद और झीरम घाटी हमले की जांच को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद यह मुद्दा और भी गरमा गया है. झीरम घाटी की घटना पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के बीच सोशल मीडिया पर जुबानी जंग छिड़ गई है.

क्या है पूरा मामला?

नक्सलवाद के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है. 30 मार्च 2026 को लोकसभा में बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस पर नक्सलवाद को लेकर गंभीर आरोप लगाए. अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने नक्सलियों को संरक्षण दिया. उन्होंने यहां तक कहा कि अगर भूपेश बघेल कहें तो वे इसके सबूत भी पेश कर सकते हैं. इस बयान के बाद सियासत गरमा गई है.

KPS गिल के इंटरव्यू का हवाला

भूपेश बघेल ने पूर्व सुरक्षा सलाहकार केपीएस गिल के इंटरव्यू का हवाला देते हुए केंद्र सरकार और गृह मंत्री पर सवाल खड़े किए और बयान को झूठ बताया. इस पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि दूसरों पर आरोप लगाने से अपने दाग नहीं छिपाए जा सकते. बीजेपी सांसद संतोष पांडेय ने भी भूपेश बघेल से तीन बड़े सवाल पूछे.

वहीं, भूपेश बघेल ने जवाबी हमला करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी ने कभी निष्पक्ष जांच होने ही नहीं दी. इसी बीच प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष किरण सिंह देव ने कहा कि कांग्रेस ने पांच साल सत्ता में रहने के बावजूद झीरम मामले में ठोस कदम नहीं उठाए. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया.

कौन हैं केपीएस गिल?

  • केपीएस गिल छत्तीसगढ़ सरकार के सुरक्षा सलाहकार रहे. (मई 2006 – मई 2007)
  • डॉ. रमन सिंह सरकार ने उन्हें बस्तर में नक्सलवाद से निपटने के लिए बुलाया था.
  • गिल ने कई इंटरव्यू में दावा किया कि उनकी सलाहों को गंभीरता से नहीं लिया गया.
  • सरकार और गिल के बीच मतभेद की खबरें भी सामने आईं थी.
  • जिसके कारण उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया गया.
  • एक चर्चित बातचीत में उन्होंने दावा किया कि जब वे नक्सलवाद को खत्म करने की योजना लेकर गए, तो उन्हें कथित तौर पर यह कह दिया गया कि आप “आराम करें और अपनी सैलरी लें.
  • वहीं, उन दिनों राज्य के कुछ अधिकारियों ने सरकार को फीडबैक दिया कि गिल का “पंजाब मॉडल” छत्तीसगढ़ के पहाड़ी और घने जंगलों वाले इलाकों में काम नहीं कर रहा है.
  • पंजाब के मैदानी इलाकों में उग्रवाद से लड़ना अलग था, जबकि बस्तर के जंगलों में नक्सलियों की गुरिल्ला युद्ध पद्धति (Guerrilla Warfare) बिल्कुल अलग थी.
  • फिलहाल झीरम घाटी हमले की जांच और नक्सलवाद का मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति के केंद्र में आ गया है. आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस मामले में कोई नई जांच या बड़ा राजनीतिक मोड़ सामने आता है.